उद्धरण - 80

मेरे भीतर जो प्राणवायु है, वह तुम्हें देखकर बहुत चंचल हो गया है । तुम्हें दिखाई नहीं देता, पर मेरे भीतर भयंकर आँधी बह रही है । मैं नहीं जानता कि वह मुझे उड़ाकर कहाँ ले जाएगी । पर वह उड़ा रही है। मैं उड़ रहा हूँ ।

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