उद्धरण - 71

बस यही कि जो मन में हो वही मुख पर हो ! मेरे लिए रंग रूप और हाव-भाव और नाजो-अन्दाज का मूल्य उतना ही है, जितना होना चाहिए ! मै वह भोजन चाहता हॅूं जिससे आत्मा की तृप्ति हो ! उत्तेजक और शोषक पदार्थों की मुझे जरूरत नहीं !

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