उद्धरण - 70

‘महाभारत‘ इसलिए नहीं कह रहा हूँ कि जो इसमें है वही अन्यत्र मिल सकता है जो इसमें नहीं हैं वह कहीं नहीं मिल सकता (यदिहास्ति तदन्यत्र, यन्नेहास्ति न तत्क्वचित्), बल्कि इसलिए कि यह बहुत भारी हैं- वज़नी! महाभारत में ही कहा गया है कि तराजू के एक पलडे़ पर वेद रखे गए, दूसरे पर यह पाँचवाँ वेद रखा गया, यही वज़नी साबित हुआ ।

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