उद्धरण - 59

पर कष्ट के दिन मैंने न जाने हों, लगातार दो चार दिन लाचारी की फाकाकशी के अवसर ना जाने हों, दुकानों के सामने खड़े होकर फल मिठाई आदि का बेबस काल्पनिक आस्वादन न किया हो, ऐसा नहीं है ।

Comments

Popular posts from this blog

उद्धरण - 797

उद्धरण - 549