उद्धरण - 56

पर एक गहरे स्तर पर एक अव्यक्त और अमुखर बन्धन हमें बाँधे हुए है, ऐसा मैं जानता हूँ। उतना ही काफी भी समझता हूँ- क्योंकि उतना शक्ति देता है, उससे अधिक जो होता है वह अवरोध करता है, व्यक्ति के विकास में बाधक होता है ।

Comments

Popular posts from this blog

उद्धरण - 797

उद्धरण - 549