उद्धरण - 300

उसकी सीख़ में एक खास बात यह थी कि वेश्या-पुत्री को एक सूदखोर बनिए की तरह निर्दयी यानी मीठी छुरी बनना चहिए जो आदर्शवादी होते हैं भुखमरी के कगार पर पहुँचा खुद रफूचक्कर हो जाते हैं।

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