उद्धरण - 296

मै थोड़ा इतराया भी कि स्निग्धा का बदलाव उसमें ही छिपे सद्गुणों का प्रगट होना भर है जिन्हें मैने अपनी छठी इन्द्रिय से पहले दिन ही ताड़ लिया था। मैने स्निग्धा को बहुत सारा कुछ सिखाया। और इस बात के लिए उसने मुझे कभी माफ नहीं किया।

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