उद्धरण - 294

हम तो जे ही सोच रहे है कि तनक उमर में उस हादसे को बताएँगे तो न जाने क्या से क्या सोच बैठे। कैसा असर ले अपने मन पर कच्ची मिट्टी है टेढे़-मेढ़े साँचों से बचाकर रखना चाहिए लरका-बिटिया को।

Comments

Popular posts from this blog

उद्धरण - 797

उद्धरण - 549