उद्धरण - 285

गुलामी भयंकर अभिशाप है। चिरई-चुरंग से लेकर मनुष्य तक कोई भी गुलामी पसन्द नहीं करता। गरीब-से-गरीब मजदूर भी नमक के साथ सूखी रोटी खा लेगा लेकिन किसी का गुलाम बनकर चिकना-चिकना भोजन पसन्द नहीं करेगा।

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