उद्धरण - 279

बऊ आदमी बड़ा बेबस जीव है। वह आदमी के हाथों ही मारा जाता है। स्यार जिनावर तक अपनी जाति का शिकार नहीं करते मगर आदमी केवल आदमी को ही खाना चाहता है। उसी को मिटाने पर तुला रहता है। बुद्धिमान होकर भी बुद्धिहीन साबित होता है।

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