उद्धरण - 278

शकुन चक्की पीस-पीसकर बेटे का जीवन बनाने में अपने-आपको स्वाहा कर देनेवाली माँ नहीं थी; बल्कि स्वतंत्र व्यक्तित्व आकांक्षाएँ और आजीविका के साधनों से दृप्त माँ थी।

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