उद्धरण - 274
दादा के कहते ही बऊ का कलेजा गड्डमड् होने लगा ज्यों किसी निजता-भरे हाथ ने उनकी लड़खड़ाहट को सम्बल प्रदान किया हो। कृतज्ञता के संवेगों को अपने भीतर सँभालना कठिन हो गया। आत्मीयता सँभली तो आँखों की कोरें भीग आई। विपति के समय कोई है उनका। कोई है उनके साथ-साथ।
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