उद्धरण - 272
कभी-कभी तो लगान में बढ़ायी गयी रकम गाँव की पैदावार से भी ज्यादा हो जावे है। महकमा जंगल तथा ज़मीनों को दनादन हड़प रया हैगा। चरागाहों को भी नहीं छोड़ते। जानवर भूखों मरे है। किसान ज़मीनें छोड़-छोड़ के भाग रहे हैं। अकाल बार-बार न पड़ेंगे तो और भला क्या होगा!
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