उद्धरण - 259

क्या तुम इतना भी नहीं जानते कि नारी परीक्षा नहीं चाहती, प्रेम चाहती है। परीक्षा गुणों को अवगुण, सुन्दर को असुन्दर बनाने वाली चीज़ है; प्रेम अवगुणों को गुण बनाता है, असुन्दर को सुन्दर!

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