उद्धरण - 255

कृपण लोगों में उत्सवों पर दिल खोलकर खर्च करने की एक प्रवृति होती है, वह उसमें भी सजग हो गयी। आखिर इसी दिन के लिए तो कौड़ी-कौड़ी जोड़ रहा था।

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