उद्धरण - 249

इस जनम में तो कोई आशा नहीं है भाई! हम राज नहीं चाहते भोग-विलास नहीं चाहते, खाली मोटा-झोटा पहनना, और मोटा-झोटा खाना और मरजाद के साथ रहना चाहते हैं। वह भी नहीं सधता।

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