उद्धरण - 242

देख रहे हो न, कि मृत्यु सबको निगलने के लिए मुँह बाए खड़ी है, और फिर भी लोग जीना चाहते हैं । सब मर जा सकता है पर जीने की इच्छा नहीं मरती ।

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