उद्धरण - 237

वैश्वानर? सम्पूर्ण विश्व का रूप ही नर-रूप में आराध्य है । खंड-दृष्टि से नहीं पूर्ण-दृष्टि से देखना ही वैश्वानर की उपासना है ।

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