उद्धरण - 231

आँख क्या है? यह कोई स्वतन्त्र वस्तु नहीं हैं, उसी के देखने का साधन है- जो देख रहा है, वही आत्मा है । नासिका गन्ध ग्रहण करने के लिए है यह साधन है जो गन्ध ग्रहण करता है, वही आत्मा है । कान सुनने के लिए है, यह साधन है, जो सुनता है वही आत्मा है ।

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