उद्धरण - 215

वह ऐसा स्पष्ट देख लेता है कि जैसे रथ के साथ घोड़ा जुता होता है वैसे ही उसका प्राण, उसका आत्मा इस शरीर रूपी रथ के साथ जुता हुआ है वह स्वयं शरीर नहीं है न शरीर तथा आत्मा का कोई मूलगत सम्बन्ध है ।

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