उद्धरण - 207

संसार में जहाँ कहीं सुन्दरता दिखती है, प्रेम दिखता है, वात्सल्य दिखता है, अनुराग दिखता है, वहीं यह अंगुलि-निर्देश भी प्रत्यक्ष हो जाता है । वह उपेक्षणीय नहीं है । निरर्थक भी नहीं है, लेकिन वही अन्त भी नहीं है । उसी के सहारे गन्तव्य तक पहुँचा जा सकता है ।

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