उद्धरण - 206

मैं विश्व-बन्धुत्व और विश्व-प्रेम पर केवल लेख लिख सकता हुँ, केवल भाषण दे सकता हूँ; वह उस प्रेम और त्याग का व्यवहार कर सकती है।

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