उद्धरण - 198

समझौता अपनी समझ में, कम कर पाता हूँ। कभी जहाँ सोचता भी हूँ कि वही व्यावहारिक होगा, वहाँ भी नहीं कर पाता- यानी युक्ति जिसे मानती है, वह भावना ग्राह्य नहीं होता, और तब भावना को अमान्य नहीं कर पाता ।

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