उद्धरण - 196

यह कभी मत भूलना कि ऐसा तप वास्तविक तप नहीं है जिसमें समस्त प्राणियों के सुख-दुख से अलग रहकर केवल अपने-आप की मुक्ति का ही सपना देखा जाता है ।

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