उद्धरण - 189

सैनिक कर्म को मैं उच्च कोटि का मानव कर्म न समझता था, न अब समझता हूँ, न क्रान्तिकारी आन्दोलन के समय समझता था; न मैं यह मानता था कि वह मेरे लिए या मैं उसके लिए उपयुक्त हूँ । पर आपातकाल में उसे करना गलत भी नहीं मानता था ।

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