उद्धरण - 184

झूठी कहानियाँ गढ़-गढ़कर इनको भुलाता रहा हूँ । ये भी जानते हैं कि झूठ है, मैं भी जानता हूँ कि झूठ है । पर थोडे़ झूठ से इनके चेहरों पर थोड़ी देर के लिए चमक आ जाती है ।

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