उद्धरण - 178

माँ, आज समाधि नहीं लग पा रही है । आँखों के सामने केवल भूखे-नंगे बच्चे और कातर दृष्टिवाली माताएँ ही दिख रही हैं । ऐसा क्यों हो रहा है, माँ?

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