उद्धरण - 174

यह देखो, यह मेरा दर्द- यह दृष्टिकोण ही रचयिता का नहीं है; दर्द दिखाकर सहानुभूति चाहना तो जीवन की सहज प्रवृत्ति है जो अपने को पीड़ित समझने वाले हर व्यक्ति में मिल सकती है ।

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