उद्धरण - 168

पारिवारिक सम्बन्ध चाहे वे वास्तविक हों या कल्पित, मनुष्य के अवचेतन को पवित्र और निर्मल बनाते हैं । जिस दिन लोग इस बात को भूल जाएँगे, उस दिन समाज उच्छिन हो जाएगा ।

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