एकान्त का तप बड़ा तप नहीं है, बेटा! देखो, संसार में कितना कष्ट है, रोग है, शोक है, दरिद्रता है, कुसंस्कार है । लोग दुःख से व्याकुल हैं । उनमे जाना चाहिए । उनके दुःख का भागी बनकर उनका कष्ट दूर करने का प्रयत्न करो । यही वास्तविक तप है ।
तुम निजी इच्छाओं की पूर्ति और उससे प्राप्त क्षणिक सन्तोष तृप्ति को राष्ट्र, समाज और मनावता की सेवा से क्यों जोड़ते हो, एक में निजी प्रतिशोध का सुख है और दूसरे में मानव अस्तित्व की गरिमा का आनन्द। करोड़ों आम लोगों से जुड़ने की दिव्य अनुभूति! यह सही है कि तुम्हारे साथ बड़ा घृणित व्यवहार किया गया है लेकिन यह समझ लो कि यह सुलूक इसलिए नहीं हुआ कि तुम ऊँचे कुल में पैदा हुए हो, तुम ब्राह्मण हो उसका स्पष्ट कारण यह है कि तुम अपने देश की आजादी, देश के लोगों का कल्याण चाहते हो!
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