उद्धरण - 165

एकान्त का तप बड़ा तप नहीं है, बेटा! देखो, संसार में कितना कष्ट है, रोग है, शोक है, दरिद्रता है, कुसंस्कार है । लोग दुःख से व्याकुल हैं । उनमे जाना चाहिए । उनके दुःख का भागी बनकर उनका कष्ट दूर करने का प्रयत्न करो । यही वास्तविक तप है ।

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