उद्धरण - 162
गृहस्थ लोग जमीन जोतकर चावल-गेहूँ आदि उगाते हैं । जो जमीन जोती जाती है उसे कृष्ट भूमि कहते हैं । पर तपस्वी लोग बिना जोती जमीन में जो पौधे अपने आप उगते हैं । और फिर स्वयं पककर झड़ जाते हैं । ऐसे दानों से ही काम चलाते हैं । इसी को अकृष्ट- पच्य अन्न कहते हैं । ये अग्नि की सहायता से उबाले जाते हैं ।
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