उद्धरण - 154

‘खा’’ कहकर दामू ने बड़ा अमरूद बातरा को दिया और दूसरा स्वयं खाने लगा । बातरा भी खाने लगी । और ज्यों-ज्यों वह खाती जाती थी, उसके भीतर जीवन-शक्ति जागृत होती जाती थी....

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