उद्धरण - 148

पत्रकार साहित्यकार नहीं है, यह वह समझता था, साहित्यकार जो क्षणिक है उस में से सनातन की छाप को, या जो सनातन है उस की तात्क्षणिक प्रासंगिकता को खोजता और उस से उलझता है, पर पत्रकार के लिए क्षणिक की क्षणिक प्रासंगिकता ही सनातन है।

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