उद्धरण - 146

बूढ़ों को चिन्ता किस बात की- एक ही जगह बैठे-बैठे पगुराते रहते हैं । अतीत की स्मृतियाँ कुरेदकर जुगाली करते हैं और फिर निगल लेते हैं ।

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