उद्धरण - 125

इतना और ऐसा निजी वह नहीं है कि उसके दावे को आप ‘एक आदमी की निजू बात’ कहकर उड़ा सकें, मेरा आग्रह है कि उसमें मेरा समाज और मेरा युग बोलता है कि वह मेरे और शेखर के युग का प्रतीक है।

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