उद्धरण - 123
वह अपने एक साक्षात्कार में कह चुके हैं कि उनके पिता, बाबा तब दंग रह गये थे जब जन्मवर्ष में उन्होंने नवरात्र बिना अपनी मां का दूध पिये गुज़ार दिया था क्योंकि मां के स्तनाग्र पसीने के कारण अशुद्ध हो गये थे और उनमें नमक का स्वाद लग गया था जो निश्चित ही सेन्हा नमक सरीखा फलाहारी नहीं था।
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