उद्धरण - 121

बात कुछ ऐसी है कि कलकत्ता अंग्रेजों द्वारा बसाए जाने के समय से ही उत्तर और दक्षिण या देसी और फिरंगी कलकत्ता में बंटा रहा है। फिरंगियों के अपने देश लौट जाने के बाद दक्षिण कलकत्ता में रहना दिन-ब-दिन हैसियत का माप होता गया।

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