उद्धरण - 118

एक बात कहती थी कि झट भूल जाती थी। उस समय उनके मन में ठहरता कुछ नहीं था। न विचार न अविचार, जैसे भीतर बस हवा हो और मन हल्का-फुल्का बस उड़-उड़ आना चाहता हो।

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