उद्धरण - 117
मणिका- वह एक शक्ति का एक विकृत और भ्रष्ट रूप था, जो ग्लानि जनक था, पर तिरस्कार्य नहीं- उसकी उपेक्षा नहीं होती थी।- मणिका की- उसकी श्रेणी की- आत्मा रोगग्रस्त थी, किन्तु थी आत्मा और वह रोग भी एक उसका अकेला नहीं था, वह आधुनिक आत्मा का रूझान ही था।’’
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