उद्धरण - 116

उपर्युक्त कथन के बाद यह कहने की तो आवश्यकता नहीं होनी चाहिए कि यद्यपि शेखर का जीवन-दर्शन सामान्यतया उसके लेखक का भी जीवन-दर्शन है, तथापि उसमें जहॉ-तहॉ शेखर जिन रेशनलाइजेशन या फैलेसीज की शरण लेता है वे शेखर की ही हैं, उसके लेखक की नहीं।

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