उद्धरण - 45

कौन कहता है कि हम-तुम आदमी हैं। हममें आदमियत कहाँ। आदमी वह है, जिनके पास धन है, अख्तियार है, इलम है। हम लोग तो बैल हैं और जुतने के लिए पैदा हुए हैं। उस पर एक दूसरे को देख नहीं सकता। एका का नाम नहीं। एक किसान दूसरे के खेत पर न चढे़ तो कोई जाफा कैसे करे, प्रेम तो संसार से उठ गया।

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