उद्धरण - 44
मैं कपड़े सी लेता हूँ, जूते गाँठ लेता हूँ, फर्नीचर जोड़ लेता हूँ, मिठाई पकवान बना लेता हूँ, जिल्दबंदी कर लेता हूँ। पंखे, साइकल, मोटर, बिजली के छोटे मोटे यंत्र- इनकी सफाई और थोड़ी बहुत मरम्मत कर लेता हूँ । विलायती ढंग के बाल काट सकता हूँ, चाभियाँ खो जावें तो ताले खोल दे सकता हूँ, सूत कात लेता हूँ, मामूली कढ़ाई कर लेता हूँ, मिट्टी के खिलौने बना लेता हूँ, काठ के ठप्पे खोदकर कपड़े छाप लेता हूँ, साँचे तैयार कर मूर्तियाँ बना लेता हूँ। प्रूफ देख लेता हूँ, कम्पोज कर लेता हूँ, प्रेस की मशीन चला लेता हूँ। फोटो खींचता हूँ, फिल्म और प्रिण्ट डेवलप कर लेता हूँ, हाथ से रंग लेता हूँ। घर की पूताई कर लेता हूँ, फावड़ा, कुल्हाड़ी, गैंती चला लेता हूँ, निराई कर लेता हूँ। बन्दूक पिस्तौल चला लेता हूँ। तैर लेता हूँ, दौड़ लेता हूँ, पहाड़ चढ़ लेता हूँ, क्रिकेट, टेनिस, बैडमिण्टन खेल लेता हूँ ।
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