उद्धरण - 40

मुझमें ब्राह्णत्व का कोई भाव नहीं है, पर उनकी इस भावना को मैं समझ सका और ब्राह्णत्व से अलग करके भी उसे आदर्शवत अपने सम्मुख रखता रहा हूँ- कि यथा सम्भव दान में या ‘मुफ्त’ कुछ नहीं लूँगा ।

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