उद्धरण - 38

उन्होंने गम्भीर मुद्रा में बताया था कि यमराज के कार्यालय में चान्द्र गणना प्रचलित है, पर विधाता के दफ्तर में सौर गणना के हिसाब से काम होता है । यमरांज पितृयान-परम्परा पर चलते हैं और ब्रह्माजी देवयान-परम्परा पर ।

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