उद्धरण - 34

‘देवदत्त मर जाए‘ कहने से देवदत्त मर नहीं जाता, यह बात तो अब लोग कहने लगे हैं । बहुत आदिम काल में सोचते थे कि अगर ध्यानपूर्वक जप किया जाए तो देवदत्त पद नहीं । इस पद का अर्थ-पदार्थ- देवदत्त मर जाएगा । कोई चित्र बनाकर उसकी छाती में छुरा भोंके तो छुरा उस चित्र के अर्थ में- जीवन्त मनुष्य में- लग जाएगा!

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