उद्धरण - 28

सच मानिए कि हर हालत में साँप प्रकाशक ही है! बाकी यह लेखक की प्रतिभा पर निर्भर है कि वह मेंढक की तरह लील लिया जाता है, या कि छछूँदर की तरह ‘गीलै बनै न बनै बिनु गीलै’ की स्थिति में प्रकाशक के गले में अटका रहता है, या कि फिर नेवले की तरह उस पर हावी हो उठता है ।

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