उद्धरण - 15

मेरे लिए रचना का यही आदर्श रहा हैः उसमें वस्तु-सत्य का, बाहरी यथार्थ का खरापन भी होना चाहिए, साथ ही आत्म-सम्बोध की, आभ्यन्तर यथार्थ की अर्थवत्ता भी होनी चाहिए ।

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